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कैसे हारे का सहारा बने खाटू श्यामजी, जानिए महाभारत की पौराणिक कथा

बाबा श्याम। हारे का सहारा। लखदातार। खाटूश्यामजी। नीले घोड़े का सवार। मोर्विनंदन। खाटू नरेश और शीश का दानी। जितने निराले बाबा श्याम के नाम और भक्त हैं। उतना ही रोचक इनका इतिहास है। आज आपको बताने जा रहे है कि राजस्थान के सीकर जिले के गांव खाटू के नरेश खाटूश्यामजी को पूरी दुनिया में शीश के दानी के नाम से भी क्यों जाना जाता है। कौन है खाटू वाले श्याम बाबा... जानिए पूरी कहानी


महाभारत से जुड़ा है इतिहास
प्राचीन कथा के अनुसार, कौरव-पांडव में युद्ध होने वाला था। ऐसे में दूर-दूर से राजा-महाराजा अपना पक्ष चुनते हुए सेना समेत युद्ध में शामिल होने पहुंत रहे थे। युद्ध की बात जंगल में रहने वाले एक नवयुवक के कानों तक भी पहुंच रही थी। उसने अपनी मां से युद्ध में जाने की आज्ञा मांगी। मां ने सहर्ष अनुमति दे दी और जाते-जाते कहा, जा बेटा हारे का सहारा बनना। वह नवयुवक मां की बात से इंच भर भी नहीं डिगता था, क्योंकि वह उसकी गुरु भी थीं। उसने अपने नीले घोड़े पर सवार होने से पहले मां को वचन दिया, जैसा आपने कहा ऐसा ही होगा। हारे का ही सहारा बनूंगा। यह नवयुवक थे महाबली घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक और उनकी महान मां मौरवी थी।

बर्बरीक के पास थी दिव्य शक्तियां
ऐसा कहा जाता है कि बर्बरीक के पास दिव्य शक्तियां थी। इस महाभारत युद्ध के लिए उनका एक ही बाण काफी है, तीनों बाण चले तो सृष्टि का ही नाश हो जाएगा। यह बाण खुद महादेव ने प्रसन्न होकर दिए हैं। इनकी विशेषता है कि एक बार में लक्ष्य करते ही यह शत्रु समूह का समूल नाश कर देता है। चाहे वह कहीं भी जा छिपा हो।
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मांगा शीशदान
मार्ग में एक ब्राह्मण मिला और बर्बरीक की परीक्षा लेने लेगा। बर्बरीक अपनी परीक्षा में पास हो गया। ब्राह्मण ने बर्बरीक के बल-कौशल की प्रशंसा की और कहा कि तुम बहुत वीर हो। इस पर बर्बरीक ने कहा, दान मांगकर देखिए आपको मिल जाएगा। मैं आपको वचन देता हूं। तब ब्राह्मण ने उनसे शीशदान मांग लिया। बर्बरीक ने कहा कि वचन देने के बाद पीछे तो नहीं हटूंगा। आप अपना वास्तविक स्वरूप दिखाइए।

 

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ऐसे कहलाए खाटू श्याम
उनकी प्रार्थना पर ब्राह्मण वेशधारी श्रीकृष्ण ने उन्हें दर्शन दिए। बर्बरीक ने कहा-अब तो मैं वचन दे चुका, लेकिन मैं महाभारत का युद्ध भी देखना चाहता था। यह इच्छा न पूरी होने का दुख है। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि तुम सृष्टि के अंत तक अमर रहोगे। तुम्हारे बाण से बिंधा मेरा यह पैर ही अब मृत्यु का कारण बनेगा जो मेरा प्रायश्चित भी होगा। तुम अब मेरे ही नाम से खाटू श्याम कहलाओगे। इसलिए आज बाबा हारे का सहारा नाम से संसार में पूजे जाते हैं।



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