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रहस्‍यमयी गुफाएं : जहां से है पाताल लोक जाने का रास्‍ता

प्रारंभिक मानव गुफा में रहता था, ऐसे में पुरातनकाल से ही गुफाओं का ऐतिहासिक महत्व तो रहा ही है।
अभगच्छत राजेन्द्र देविकां विश्रुताम्। प्रसूर्तित्र विप्राणां श्रूयते भरतर्षभ॥- महाभारत
अर्थात : सप्तचरुतीर्थ के पास वितस्ता नदी की शाखा देविका नदी के तट पर मनुष्य जाति की उत्पत्ति हुई। प्रमाण यही बताते हैं कि आदि सृष्टि की उत्पत्ति भारत के उत्तराखंड अर्थात इस ब्रह्मावर्त क्षेत्र में ही हुई।

गुफाओं के अंदर की दुन‍िया भी कुछ कम रोमांचक नहीं लगती। अमूमन हम पढ़ते और सुनते हैं क‍ि क‍िसी गुफा में कभी ऋषि-मुन‍ियों ने तपस्‍या की, तो क‍िसी ने गुफाओं में ग्रंथ ल‍िखे।

Mystic Caves which are relaed with patallok

वैज्ञानिकों ने दुनिया की सबसे प्राचीन पहाड़ी अरावली और सतपुड़ा की पहाड़ियों को माना है। यूनान के लोगों की धारणा थी कि उनके देवता गुफाओं में ही रहते थे। इसी प्रकार रोम के लोगों का मानना था कि गुफाओं में परियां तथा जादू-टोना करने वाले लोग रहते हैं।

फारस के लोग मानते थे कि गुफाओं में देवताओं का वास होता है। आज का विज्ञान कहता है कि गुफाओं में एलियंस रहते थे। गुफाओं का इतिहास सदियों पुराना है।

हिन्दू इतिहास ग्रंथ पुराणों में त्रैलोक्य का वर्णन मिलता है। ये 3 लोक हैं- 1. कृतक त्रैलोक्य, 2. महर्लोक, 3. अकृतक त्रैलोक्य। कृतक और अकृतक लोक के बीच महर्लोक स्थित है। कृतक त्रैलोक्य जब नष्ट हो जाता है, तब वह भस्म रूप में महर्लोक में स्थित हो जाता है। अकृतक त्रैलोक्य अर्थात ब्रह्म लोकादि, जो कभी नष्ट नहीं होते।

विस्तृत वर्गीकरण के मुताबिक तो 14 लोक हैं- 7 तो पृथ्वी से शुरू करते हुए ऊपर और 7 नीचे। ऊपर के लोक में - भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और ब्रह्मलोक। इसी तरह नीचे वाले लोक हैं- अतल, वितल, सतल, रसातल, तलातल , महातल और पाताल।

जहां तक गुफाओं का संबंध है तो कुछ गुफाओं का संबंध पाताल लोक से भी माना जाता है। ऐसे में कुछ को उनकी गहराई के ल‍िए जाना जाता है तो कुछ को उनकी श‍िल्‍पकलाओं के ल‍िए। भारत के अलावा व‍िदेश में भी ऐसी रहस्‍यमयी गुफाओं की लंबी फेहर‍िस्‍त है। तो आइए ऐसी ही गुफाओं के बारे में हम यहां व‍िस्‍तार से जानते हैं….

व‍िदेश की गुफाओं से पहले आइए जानते हैं कर्नाटक के बगलकोट जिले की ऊंची पहाड़ियों में स्थित बादामी गुफा के बारे में। यह बहुत ही खूबसूरत गुफा है। इसमें निर्मित हिंदू और जैन धर्म के चार मंदिर अपनी खूबसूरत नक्काशी, कृत्रिम झील और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध हैं।

चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफा की श‍िल्‍पकारी भी बेहतरीन है। बता दें क‍ि इस गुफा में भगवान विष्णु और भगवान शिव का एक मंद‍िर भी है।

1. क्रूबर, वोरोन्या के ब्‍लैक सागर के तट पर अबकाजिया शहर में स्थित है। माना जाता है क‍ि यह दुनिया की सबसे गहरी गुफा है। इस गुफा की गहराई 2197 मीटर यानी लगभग 7208 फीट है। यह गुफा धरती के अंदर कई शाखाओं में बंटी हुई है।

यही वजह है क‍ि पुरातत्व विद्वानों ने इस गुफा को पाताल लोक का रास्ता भी कहा है। इस पाताली गुफा की खोज वर्ष 1960 में की गई थी। यूं तो इसका मूल नाम क्रूबर है लेक‍िन इसे वोरोन्या यानी क‍ि कौओं की गुफा भी कहते हैं।

2. वहीं ह‍िमालय की वाद‍ियों में भी कई गुफाएं हैं जिनका संबंध पाताल लोक से माना जाता है। उन्हीं में से एक गुफा है पाताल भुवनेश्वर... ज‍िसका ताल्‍लुक पाताल लोक से बताया जाता है। इस गुफा के बारे में महर्षि वेदव्यास जी ने स्कंद पुराण के मानसखंड 103 वें अध्याय में उल्लेख किया है।

यह गुफा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में समुद्र तल से 1670 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। बताया जाता है क‍ि इस गुफा के अंदर कई ऐसे रास्ते हैं, ज‍िनके व‍िषय में स्‍कंद पुराण में बताया गया है क‍ि ये रास्‍ते पाताल लोक को जाते हैं। हालांक‍ि इन रास्‍तों का रहस्‍य आज तक क‍िसी को समझ नहीं आया।

3. ओडीशा में भुवनेश्वर के पास स्थित दो पहाड़ियां
हैं उदयग‍िर‍ि और खंडग‍िरी। बता दें क‍ि इन पहाड़ियों में आंशिक रूप से प्राकृतिक व आंशिक रूप से कृत्रिम गुफाएं हैं। इनका पुरातात्विक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। हाथीगुम्फा शिलालेख में इनका वर्णन ‘कुमारी पर्वत’ के रूप में आता है।

ये दोनों गुफाएं लगभग दो सौ मीटर के अंतर पर हैं और एक दूसरे के सामने हैं। ये गुफाएं अजंंता और एलोरा जितनी प्रसिद्ध तो नहीं हैं लेकिन इनका न‍ि‍र्माण बेहतरीन तरीके से क‍िया गया है जो बरबस ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।



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