ads

शिव-पार्वती के विवाह का वो स्थान जहां तीन युगों से जल रही है अग्नि, जानिए उस जगह के बारे में

नई दिल्ली। महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च को पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाने वाला है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। कहा जाता है भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। और उनकी इसी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन माता पार्वती के साथ विवाह किया था।

कहा जाता है कि जिस जगह पर माता पार्वती ने तपस्या करके भगवान शिव के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था, वह जगह आज भी मौजूद है। क्या आप भी जानना चाहेगें उस जगह के बारे में, जहां पर हुआ था शिव-पार्वती का विवाह,आइए जानते हैं…

यह भी पढ़ें:- Mahashivratri Vrat Recipe: महाशिवरात्रि व्रत के लिए बनाएं ये खास पकवान, मिलेगी भरपूर एनर्जी

यहां हुआ था शिव-पार्वती का विवाह

महादेव ने जिस जगह पर माता पार्वती के विवाह प्रस्ताव को स्वीकार किया था वो जगह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के नाम से जानी जाती है। इसी जगह पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, रुद्रप्रयाग के इस स्थान को त्रिर्युगी नारायण के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि इस गांव में दोनों का विवाह संपन्न हुआ था और तब यह हिमवत की राजधानी थी।इस मंदिर के प्रांगण में कई ऐसी अद्भुत चीजें हैं, जो इनकी मौजूदगी के बारे में दर्शाती हैं।...

त्रिर्युगी नारायण में ऐसे तीन कुंड हैं जंहा पर स्वयं ब्रह्मा विष्णु ने इन कुंड पर स्नान करके भगवान शिव-पार्वती के विवाह में शामिल हुए थे।

मंदिर के प्रांगण में जहां भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, वहां आज भी अग्नि जलती रहती है। बताया जाता है कि तीनों युगों से यह अखंड जल रही है। इसे त्रिर्युगी नारायण मंदिर की अंखड धुनी भी कहा जाता है। इसी अग्नि के चारों ओर भगवान शिव और माता पार्वती ने सात फेरे लिए थे। इस अग्नि कुंड की राख को लोग अपने घर ले जाते हैं।जिससे उनके वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी नहीं आती।



Source शिव-पार्वती के विवाह का वो स्थान जहां तीन युगों से जल रही है अग्नि, जानिए उस जगह के बारे में
https://ift.tt/3bzlLD2

Post a Comment

0 Comments