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Chaitra Navratri 2021: मां के वे स्वरूप जिनकी पूजा करने से दूर होते हैं ग्रहों के कष्ट

नई दिल्ली।

चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2021), जिसे वासंतिक नवरात्र भी कहते हैं, इसकी शुरुआत 13 अप्रैल दिन मंगलवार से हो चुकी है। इस बार यह नवरात्र नौ दिन यानी 21 अप्रैल तक रहेगा। वैसे तो चैत्र नवरात्रों के दौरान माता रानी के नौ स्वरूपों की उपासना होती है, मगर खास बात यह है कि मां के साथ-साथ इस बीच अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा भी की जाती है। इससे नवरात्र की यह पूजा विषेष हो जाती है। देवी मां के 9 स्वरूपों को शास्त्रों में श्लोकों के जरिए बताया गया है।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रम्हाचारिणी।
तृतीयं चंद्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थकमïï।।
पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमं।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रम्हणैव महात्मना:।।

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मां शैलपुत्री
अपने पहले स्वरूप में मां शैलपुत्री के नाम से जानी जाती हैं। नवदुर्गाओं में यह प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री स्वरूप में जन्म लेने की वजह से इनका नाम शैलपुत्री रखा गया। इनकी उपासना करने से व्यक्ति का चंद्रमा से संबंधित दोष समाप्त होता है।

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मां ब्रम्हाचारिणी
नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रम्हाचारिणी की पूजा की जाती है। इन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तप किया था। इस वजह से इन्हें ब्रम्हाचारिणी के नाम से जाना जाता है। मां ब्रम्हाचारिणी की पूजा से व्यक्ति का मंगल ग्रह से संबंधित दोष कम होता है।

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मां चंद्रघंटा
नवदुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्र में तीसरे दिन इनकी पूजा होती है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है। इसी वजह से इनका यह नाम पड़ा। इनकी पूजा से शुक्र ग्रह से संबंधित दोष समाप्त होते हैं।

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मां कूष्मांडा
नवरात्र के चौथे दिन देवी के कूष्मांडा स्वरूप की उपासना होती है। माना जाता है कि उन्होंने अपनी मुस्कान से ब्रम्हांड को उत्पन्न किया था। मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं और इनकी उपासना से सूर्य से संबंधित दोष कम होते हैं।

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मां स्कंदमाता
नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की उपासना होती है। मान्यता है कि इनकी कृपा से मूर्ख भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इनकी पूजा से बुध ग्रह से संबंधित दोष दूर होते हैं।

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मां कात्यायनी
नवदुर्गा के छठें स्वरूप का नाम कात्यायनी है। इनकी पूजा से भक्तों को आसानी से कर्म, धन, धर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। महर्षि कात्यायन ने पुत्री प्राप्ति की इच्छा के लिए मां भगवती की कठिन तपस्या की, जिसके बाद उनके घर पुत्री स्वरूप में जन्म लिया, जिससे इनका नाम कात्यायनी पड़ा।

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मां कालरात्रि
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना होती है। कालरात्रि की पूजा करने से ब्रम्हांड की सारी सिद्धियों के द्वार खुल जाते हैं और सभी आसुरी शक्तियों का नाश होता है।

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मां महागौरी
नवदुर्गा की आठवीं स्वरूप का नाम महागौरी है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद होने की वजह से इन्हें श्वेतांबरधरा भी कहा गया है। इनकी पूजा करने से राहु के बुरे प्रभाव दूर होते हैं।

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मां सिद्धिदात्री
नवरात्र पूजन के नौंवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इस दिन विधि-विधान और पूरी निष्ठा से उपासना करने वालों को सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि भगवान शिव ने भी सिद्धिदात्री की कृपा से सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं। मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से केतु ग्रह के दोष दूर होते हैं।



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