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Guru Nanak Jayanti 2021: गुरु नानक को देख कर दंग रह गया था ये मुगल बादशाह, फिर उठाया था बड़ा कदम

नई दिल्ली। सिख धर्म के अनुयायियों के लिए 15 अप्रैल का दिन काफी अहम है। इस दिन सिख धर्म के संस्‍थापक और पहले गुरु नानक देव ( Guru Nanak Jayanti 2021 ) का जन्‍मदिन है। सन 1469 को तलवंडी राय भोइ की (अब पाकिस्तान में), जिसे अब ननकाना साहिब कहा जाता है, में बाबा मेहता कालू और माता तृप्ता के यहां जन्मे बालक को नानक का नाम दिया गया।

हालांकि उनका जन्मदिन अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से नहीं मनाया जाता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा को दुनियाभर में गुरूनानक जी की जयंती को गुरूपर्ब के रूप में मनाया जाता है।

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गुरु नानक देव जी ने हमेशा ही सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया और समाज को सही राह दिखाने वाले दिव्य पुरुष की तरह प्रसिद्ध हुए। उनका तेज इतना था कि मुगल बादशाह भी देख कर दंग रह गए थे।

मुगलों ने गुरु नानक के तेज को समझा
1526 में जब बाबर ने मुगल वंश की नींव भारत में रखी। इस दौरान बाबर ने भारतीयों पर जमकर जुल्म किए। बाबर जुल्म करता और लोगों को जेल में डालता रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को बंदी बना लिया गया। इन्हीं से एक गुरु नानक भी थे।

लेकिन जब बाबर जेल में जाकर उनसे मिला तो उनके चेहरे का नूर देखकर दंग रह गया। मुगल बादशाह बाबर ने उन्हें संत समझकर तुरंत रिहा कर दिया

बाबर ने भारत पर 1519 से 1526 के बीच पांच बार आक्रमण किया। आखिरी बार के आक्रमण में सफल होकर उसने पानीपत के मैदान में इब्राहिम लोदी को हराकर मुगल वंश की नींव रखी थी।

गुरुग्रंथ साहिब में गुरु नानक ने बाबर के जुल्मों और शासन का आंकलन किया। वे कहते हैं- बाबरवाणी फिरी गई कुईरू ना रो खाई, इसका मतलब है- बाबर का साम्राज्य फैल रहा है। जुल्म की हद ये है कि शहजादियों तक ने भी खाना नहीं खाया है।

बाबर के ऐसे किस्सों के जिक्र के संग्रह को बाबरवाणी कहा जाता है। इसमें नानक ने बाबर के आक्रमणों के बार में भी लिखा।

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अपनी रिहाई पर ये बोले- गुरु नानक
जब बाबर ने गुरु नानक का नूर देख और उनके विचार सुने तो उनसे माफी मांगते हुए उन्हें रिहा कर दिया। अपने हिराई के फरमान पर नानक ने बाबर को जवाब दिया, 'मैंने तो तुम्हे पहले ही माफ कर दिया, लेकिन तुम्हें अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए। वैसे तुम शहर के बाशिंदों को रिहा कर भी माफी पा सकते हो।



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