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Matsya Jayanti 2021 : वेदों को वापस लाने व पृथ्वी को जल प्रलय से बचाने के लिए आज ही के दिन भगवान विष्णु ने लिया था अवतार

सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार पृथ्वी पर जब भी कोई संकट आता है तो भगवान अवतार लेकर उस संकट को दूर करते हैं। ऐसे में भगवान विष्णु के दस अवतार माने जाते हैं जिन्हें दशावतार भी कहते हैं। इसी तरह शिव और अन्य देवी-देवताओं के भी कई अवतारों का धार्मिक ग्रंथों में जिक्र मिलता है।

वहीं भगवान विष्णु के ‘कल्कि अवतार’ का अभी आना शेष माना गया है।

चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हिन्दू पंचांग के अनुसार मत्स्य जयंती मनाई जाती है। ऐसे में इस बार यानि 2021 में चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानि आज 15 अप्रैल को मतस्य जयंती मनाई जानी है। मत्स्य अवतार भगवान विष्णु का पहला अवतार माना जाता है।

इस अवतार में विष्णु जी मछली बनकर प्रकट हुए थे। मान्यता के अनुसार एक राक्षस ने जब वेदों को चुरा कर समुद्र की गहराई में छुपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में आकर वेदों को बचाया और उन्हें फिर स्थापित किया।

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भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार के संबंध में यह भी माना जाता है कि पृथ्वी को जल प्रलय से बचाने के लिए उन्होंने ये अवतार धारण किया था। मान्यता के अनुसार जब मानव अन्याय और अधर्म के दलदल में खो जाता है, तब भगवान विष्णु ( Vishnu temples ) उसे सही रास्ता दिखाने के लिए अवतार ग्रहण करते हैं।

इस संबंध में स्वयं श्रीकृष्ण ( Shri krishna ) के द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है...

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे-युगे॥

अर्थात् जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का उत्थान हो जाता है, तब-तब सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए मैं विभिन्न युगों में उत्पन्न होता हूं।

मत्स्य अवतार को ऐसे समझें...
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालन करने वाला माना गया है, ऐसे में वे ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भी कई अवतार धारण करते हैं।

यह अवतार भगवान ने वेदों को बचाने के लिए और असुर हैग्रीव को मारने के लिए साथ ही साथ वैवस्वत मनु, सप्तऋषि वह सारे जीव जन्तुओं को प्रथम कल्प की प्रलय से बचाने के लिए भी लिया था।

शुभ मुहूर्त 2021-

तृतीया तिथि आरंभ: 14 अप्रैल 2021, बुधवार दोपहर 12 बजकर 47 मिनट से

तृतीया तिथि समाप्त: 15 अप्रैल 2021, गुरुवार दोपहर 3 बजकर 27 मिनट तक

मत्स्य अवतार की पौराणिक कथा : mythological story

कथा के अनुसार ब्रम्हांड की शुरुआत में प्रजापति ब्रह्मा के पास से असुर हयग्रीव ने वेदों को चुराकर समुद्र में छिपा दिया। तब भगवान विष्णु अपने प्राथमिक अवतार मत्स्य के रूप में अवतरित हुए और स्वयं को राजा सत्यव्रत मनु के सामने एक छोटी, लाचार मछली बना लिया।

सुबह सत्यव्रत सूर्यदेव ( Lord surya ) को अर्घ्य दे रहे थे तभी एक मछली नें उनसे कहा कि आप मुझे अपने कमंडल में रख लो। इस पर राजा ने दया और धर्म के अनुसार मछली को अपने कमंडल में रख लिया और घर की ओर निकले, घर पहुंचने तक वह मछली उस कमंडल के आकार का हो गई, राजा नें इसे एक पात्र पर रखा परंतु कुछ समय बाद वह मछली उस पात्र के आकार की हो गई।

अंत में राजा नें उसे समुद्र में डाला तो उसने पूरे समुद्र को ढक लिया। उस सुनहरे-रंग की मछली ने अपनी दिव्य पहचान उजागर की और सत्यव्रत के समक्ष भगवान विष्णु ( LORD VISHNU ) अपने असली स्वरूप में प्रकट होकर कहा कि उस दिवस के ठीक सातवें दिन प्रलय आएगा जिसके बाद विश्व का नया सृजन होगा वे सत्यव्रत को सभी जड़ी-भूति, बीज और पशुओं, सप्त ऋषि आदि को इकट्ठा करके प्रभु द्वारा भेजी गई नाव में संचित करने को कहा।

उन्होंने ये भी कहा कि इस समय प्रचंड आंधी के कारण जब नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं मत्स्य रूप में तुम सबको बचाऊंगा। तुम लोग नाव को मेरे सींग से बांध देना। प्रलय के अंत तक मैं तुम्हारी नाव खींचता रहूंगा। उस समय भगवान मत्स्य ने नौका को हिमालय की चोटी से बांध दिया। उसे चोटी को ‘नौकाबंध’ कहा जाता है।

ठीक सातवें दिन वहीं सब हुआ जो भगवान विष्णु ( Shri hari vishnu ) ने कहा था, प्रचंड आंधी का प्रकोप शांत होने पर भगवान विष्णु ने मछली के रूप में हयग्रीव का वध किया और वेदों को पुनः ब्रह्माजी को सौंप दिया। जब ब्रह्मा अपने नींद से उठे जो प्रलय के अन्त में था, इसे ब्रम्ह की रात पुकारा जाता हैं।

भगवान ने प्रलय समाप्त होने पर राजा सत्यव्रत को वेद का ज्ञान वापस दिया। राजा सत्यव्रत ज्ञान-विज्ञान से युक्त हो वैवस्वत मनु कहलाए। इस नौका में जो बच गए थे, उन्हीं से संसार में पुनः जीवन चला।



Source Matsya Jayanti 2021 : वेदों को वापस लाने व पृथ्वी को जल प्रलय से बचाने के लिए आज ही के दिन भगवान विष्णु ने लिया था अवतार
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