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Nag Panchami 2021 : इस नाग पंचमी पर किस समय बन रहा है कौन सा शुभ योग और जानें पूजा का शुभ समय

सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाने वाला नागपंचमी पर्व इस वर्ष 2021 में अत्यंत ही शानदार योग का निर्माण कर रहा है। दरअसल इस बार यह पर्व शुक्रवार, 13 अगस्त 2021 को मनाया जाना है।

जानकारों के अनुसार सनातन संस्कृति में नागों की पूजा भी, शिवजी को प्रिय श्रावण माह में ही की जाती है। माना जाता है कि भगवान शंकर के गले में नागराज वासुकि विराजमान है , तो वहीं श्री गणेश जी जनेऊ की तरह सर्प को ही धारण करते हैं।

बताया जाता है कि इस बार 2021 में नागपंचमी में बनने वाले योग का निर्माण करीब 108 साल बाद हो रहा है। इसके तहत जहां एक ओर ऐसा खास संयोग बन रहा है जो व्यक्ति को काल सर्प दोष से मुक्ति प्रदान करेगा।

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वहीं शुक्रवार के दिन नागपंचमी का पर्व हस्त-नक्षत्र व साध्य योग में मनाया जाएगा। शुक्रवार को पंचमी तिथि दोपहर 1.42 बजे तक रहेगी। वहीं ज्योतिष के जानकारों के अनुसार 108 साल बाद उत्तरायोग, हस्त नक्षत्र,शिर नक्षत्र जैसे शुभ योग बन रहे हैं। हस्त-नक्षत्र शाम 7.58 बजे तक और साध्य योग शाम 6.48 बजे तक रहेगा।

पंचमी तिथि की शुरुआत दोपहर 03.24 मिनट पर 12 अगस्त को होगी, जबकि इसकी समाप्ति 13 अगस्त को दोपहर 01.42 मिनट पर होगी।

पूजा मुहूर्त-

13 अगस्त को पूजा का सबसे खास मुहूर्त : सुबह 5.48.53 बजे से लेकर सुबह 8.27.42 तक रहेगा।

वहीं इस दिन बनने वाले योग 12 में से 4 राशि वाले जातकों के लिए बेहद खास होने की उम्मीद है।

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इन राशि वालों के लिए है खास...

जानकारों के अनुसार नागपंचमी के दिन शुभ योगों में की गई नागपंचमी की पूजा चार राशि के जातकों के लिए किस्मत के दरवाजे खोलती दिख रही है।

- मिथुन राशि: इन्हें बहुत लाभ होगा। इस राशि के जातक जिस काम को भी मेहनत व लगन से करेंगे, उसमें उन्हें सफलता मिलेगी।

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- कर्क राशि: शिवलिंग पर जल अर्पित करने से किस्मत खुलने के साथ ही आपके रूके कार्य भी पूर्ण हो जाएंगे।

- तुला राशि: इस राशि की तरक्की के खास योग बन रहे हैं। एक ओर जहां इस राशि के लोगों को व्यवसाय में विशेष लाभ होता दिख रहा है, वहीं नौकरी पेशा लोगों को भी पदोन्नति प्राप्त हो सकती है, लेकिन अपने काम में 100 फीसदी देना होगा, तभी लाभ होगा।

- कुंभ राशि: अपनी प्रतिभा के चलते ये जातक विशेष पद प्राप्त कर सकते हैं, इनके कॅरियर में उछाल यात्रा करने से आता दिख रहा है।

वहीं इस दिन यानि नागपंचमी के दिन नाग को धारण किए शिव पर दूध दही से लेकर घी, पुष्प, भांग व चंदन सहित कई पूजा सामग्रियों से अभिषेक किया जाएगा।

जानकारों के अनुसार पुराणों में सूर्य के रथ में 12 नागों की बात सामने आती है। इन सभी नागों की पुष्टि देवता के रूप में ही होती है। ऐसे में साल के सभी माह में इनमें से एक-एक नाग की पूजा करनी चाहिए।

माना जाता है कि ऐसा करने से धन प्राप्ति के साथ ही नागों का भय भी समाप्त होता है। इसके अलावा नाग पूजा संतान प्राप्ति के लिए भी की जाती है। इस दौरान‘ओम कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा’ का जाप भी शुभ माना जाता है। राहु और केतु की बुरी दशा में भी यह पूजा अत्यंत शुभ फल प्रदान करेगी।

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वहीं नाग-नागिन के जोड़े को नाग पंचमी के दिन गोदुग्ध से स्नान कराने का विधान है। स्नान कराने के बाद नवीन वस्त्र व विविध पूजा सामग्री से महिलाएं और परिजन श्रद्धा पूर्वक नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करते हैं। वहीं मालवा क्षेत्र के अनेक घरों में इस दिन चूल्हे पर तवा नही चढ़ाया जाता है।

इस दिन नागों को केवल गाय के दूध से स्नान कराने का कारण उन्हें दाहपीड़ा से छुटकारा दिलाने के साथ ही शीतलता प्रदान करना है। माना जाता है कि गाय का दूध सर्प भय से मुक्ति भी दिलाता है। इन तथ्यों की पुष्टि के लिए पुराणों में अनेक कथाएं और आख्यान भी मिलते हैं।

देश में अनेक स्थानों पर नागपंचमी के दिन नागों का धार्मिक विधि से चित्रांकन किया जाता है। ऐसे में स्वर्ण, रजत, लकड़ी या पवित्र मिट्टी के नाग बनाकर उनकी पूजा की जाती है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार भारतीय संस्कृति में नाग को देवता के रूप में माना जाता है। श्री गणेश जी की जनेउ के रूप में तो वहीं शिव के गले में और भगवान विष्णु की शेष शय्या से इनका संबंध है।

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किस ग्रह का कौन सा नाग:

जानकारों के अनुसार नागों में अनंत नाग सूर्य का तो वहीं वासुकि नाग चंद्रमा का, तक्षक, नाम मंगल का, जबकि कर्कोटक नाग बुध का ,पद्म नाग बृहस्पति का,महापद्म नाग शुक्र का और कुलिक व शंखपाल नाग शनि ग्रह का रूप माने जाते हैं।



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