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Putrada Ekadashi 2021 संतान सुख के लिए सबसे शुभ संयोग, जानें पुत्रदा एकादशी व्रत और पूजा विधि

जयपुर. सावन महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी पुत्रदा एकादशी के रूप में जानी जाती है। यह दिन विष्णुजी को समर्पित है. एकादशी पर व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। माना जाता है कि पुत्रदा एकादशी संतान सुख के लिए सर्वश्रेष्ठ व्रत है। पौष माह में भी पुत्रदा एकादशी आती है पर सावन के महीने में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी व्रत का खास महत्व है। इस बार यह एकादशी 18 अगस्त 2021 बुधवार के दिन यानि आज मनाई जा रही है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु के नारायण रूप की पूजा करनी चाहिए। पुत्रदा एकादशी पर नहाने के पानी में तिल मिलाकर स्नान करने की भी परंपरा है। बुधवार को एकादशी होने से इस दिन गणेशजी की पूजा भी करनी चाहिए। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा का बहुत महत्व है। इसलिए एकादशी पर विष्णु पूजन से पहले शिवाभिषेक जरूर करें।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि सुबह स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इस दौरान गायत्री मंत्र का उच्चारण करें। सूर्य पूजन के बाद तुलसी को जल चढ़ाएं। तुलसी के समक्ष घी का दीपक लगाकर परिक्रमा भी करें। एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी जरूर चढ़ाना चाहिए पर याद रखें कि एकादशी तिथि के दिन तुलसी तोड़ना पूर्णतः वर्जित है। यहां तक कि तुलसी छूना भी नहीं चाहिए. तुलसी पूजन के बाद विधिविधान से भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की पूजा करें।

संतान के इच्छुक पति-पत्नि दोनों मिलकर भगवान विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। विष्णुजी के मंत्रों का जाप करें या पुरूष सूक्त का पाठ करें. इस दिन विष्णु सहस्रनाम स्त्रोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम स्त्रोत्र का पाठ करने से संतान सुख में आनेवाले अवरोध खत्म होते हैं. निस्संतान दंपत्ति को संतान प्राप्ति के योग बनते हैं और संतान के दुख दूर होकर उन्हें सुख प्राप्त होेने लगते हैं।



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